अवैध रेत उत्खनन और माफियाओं की गुंडागर्दी चरम पर।अवैध खनन को लेकर क्षेत्रवासियों में आक्रोश का माहौल।


रिपोर्ट- रमाकान्त मिश्रा संपादक SNN24NEWS

गौरिहार – काफी अर्से से लगातार अवैध खनन क्षेत्र के लिए नासूर बन चुका है जहां आए दिन रेत माफियाओं की शिकायत नीचे से ऊपर तक की जा रही है किंतु प्रशासन है कि कान में रुई ठूंस कर बैठा है पिछले दिनों कई सड़क हादसों में ओवरलोड ट्रकों द्वारा कई निर्दोषों की जानें जा चुकी हैं तो दूसरी ओर माफियाओं द्वारा रामपुर के ग्रामीणों के ऊपर फायर कर जानलेवा हमले भी हो चुके हैं रेत माफियाओं का आतंक इस कदर हावी हो चुका है कि इस क्षेत्र का हर व्यक्ति दहसत में नजर आ रहा है हाल ही का एक मामला चुकेहटा पंचायत का है जहां खदान स्वीकृत ना होते हुए भी धौराहरा घाट पर केन नदी से कच्चा रखता बनाकर उत्तर प्रदेश निकासी जबरन की जा रही है जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने प्रशासन से की है किंतु अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।

आए दिन हो रहे सड़क हादसे

अभी तक ओवरलोड ट्रकों की चपेट में आने से जा चुकी है कई निर्दोषों की जान ,बेतहाशा दौड़ रहे ओवरलोड ट्रक आदमियों को कीड़े मकोड़े की तरह रौंद रहे हैं पता नहीं कब तक चलेगा ये मृत्यु का तांडव सरबई गौरिहार रोड पर पिछले दिनों एक युवक की जान चली गई जो उत्तर प्रदेश का निवासी था उसके पहले भी एक महिला अपनी जान गवां चुकी है रामपुर में ऐसे कई हादसे हैं जिन्हें याद करते रोंगटे खड़े हो जाते हैं किंतु प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंगती।

गुंडागर्दी पर उतरे रेत माफिया।

पिछले दिनों रेत माफियाओं द्वारा गौरिहार तहसील के रामपुर में ग्रामीणों के ऊपर फायर कर जान लेने की कोशिश की गई हालांकि दोषी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है परंतु इसकी गारंटी कौन लेगा कि दोबारा ऐसी घटना नहीं घटेगी ऐसी घटनाओं को लेकर समूचे क्षेत्र में भय का माहौल निर्मित हो चुका है।

एमपीआरडीसी की सड़कों एवं पुलों का हुआ सत्यानाश।

ओवरलोड ट्रकों के चलते एमपी यूपी को जोड़ने वाले एकमात्र पुल की हालत किसी से छिपी नहीं है जिसे देखते हुए बांदा डीएम ने तत्काल प्रभाव से आवागमन बंद कर दिया था वहीं दूसरी और पुल बंद होने से ट्रकों की निकासी सरबई गौरिहार होते हुए चालू कर दी गई जिससे एमपीआरडीसी की सड़क जो बरसों के इंतजार के बाद क्षेत्रवासियों को मिली थी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है कई बार इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से भी की गई फिर भी असर बेअसर ही रहा।
उपरोक्त स्थितियों को देखते हुए प्रशासनिक अनसुनी को यही कहा जा सकता है कि कहीं ना नीचे से लेकर ऊपर तक सब के सब रेत माफियाओं की कठपुतली मात्र हैं जनता मरे या जिंदा रहे इस बात से कोई सरोकार नहीं है बस लक्ष्मी मेहरबान रहे इतना ही काफी है नदी को छोड़कर खेतों से निकाली जा रही रेत एक दिन इस समूचे क्षेत्र को कब्रिस्तान में तब्दील कर देगी यह एक परम सत्य है।

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