आधी रात FIR से गरमाया छतरपुर: पत्रकार पर कार्रवाई को लेकर सियासी साजिश के आरोप, प्रेस जगत में उबाल।

पत्रकारिता को बदनाम करने की साज़िश या सोची समझी चाल।

छतरपुर। जिले में एक बार फिर पत्रकारिता की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महाकवरेज न्यूज़ से जुड़े पत्रकार राकेश रिछारिया के खिलाफ सिविल लाइन थाने में आधी रात करीब 12 बजे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं—296(बी), 115(2), 324(4), 351(2) और 3(5)—के तहत मामला दर्ज किए जाने से माहौल अचानक गरमा गया है। इस कार्रवाई ने न सिर्फ स्थानीय बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी पत्रकारों और सामाजिक संगठनों को आक्रोशित कर दिया है।
आधी रात की कार्रवाई पर उठे सवाल।
सबसे बड़ा सवाल FIR दर्ज करने के समय को लेकर उठ रहा है। पत्रकारों का कहना है कि आधी रात में इस तरह की कार्रवाई कई शंकाओं को जन्म देती है। आमतौर पर गंभीर और संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता बरतने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन इस मामले में जिस समय और तरीके से केस दर्ज किया गया, उसने पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बना दिया है।

सियासी साजिश के आरोप

स्थानीय पत्रकारों और रिछारिया के समर्थकों का आरोप है कि यह कार्रवाई एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा है। उनका कहना है कि राकेश रिछारिया लंबे समय से क्षेत्र के विभिन्न मुद्दों—जैसे प्रशासनिक अनियमितताएं, स्थानीय राजनीति और जनहित से जुड़े मामलों—पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग कर रहे थे। ऐसे में उनकी आवाज को दबाने के उद्देश्य से उन पर झूठा मामला दर्ज किया गया है।

पत्रकार संगठनों में रोष

घटना की जानकारी मिलते ही जिले के कई पत्रकार संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठनों ने इसे “पत्रकारिता पर सीधा हमला” करार देते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पत्रकारों का कहना है कि यदि इस तरह बिना ठोस आधार के पत्रकारों पर कार्रवाई होती रही, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता करना मुश्किल हो जाएगा।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर खतरा?

वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मीडिया जगत के लिए चेतावनी है। उनका कहना है कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होते हैं और यदि उन्हें ही दबाने की कोशिश की जाएगी, तो आम जनता की आवाज भी कमजोर पड़ जाएगी।

प्रशासन की चुप्पी

फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, पुलिस का कहना है कि मामला तथ्यों के आधार पर दर्ज किया गया है और जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।

निष्पक्ष जांच की मांग तेज

पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि किसी प्रकार की साजिश या दबाव सामने आता है, तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
छतरपुर में पत्रकार पर आधी रात दर्ज हुई FIR ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता को लेकर जमीनी स्तर पर कितनी चुनौतियां मौजूद हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं।

Journalist Arvind Jain Bhupendra Singh Mursleem Journalist CM Madhya Pradesh Jansampark Sagar बागेश्वर धाम सरकार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *